अरे बहू कीतनी पतली हो गई हो| Saas Aur Bahu ki kahani {Indianwomania}

patli bahu

फ़ोन की घंटी की आवाज़ सुन नीतू फॉरेन कॉल उठाती ह .. हेलो माँ जी प्रणाम .

सासु माँ- सुहागबति रहो बहु! अपने मायके वालों में इतनी वयस्त रहती हो सासु माँ की याद ही नही आती मैं सुबह से तुम्हारे फ़ोन का इंतज़ार कर रही थी. कॉल नही आया तो सोचा कि चलो मैं ही हाल चाल पूछ लेती हूं .

नीतू- ऐसी बात नही ह माँ जी मैं सोची थी कि आपसे आराम से साम में बात करूँगी. आपका पोता सुबह से काफी परेशान कर रहा था, इसीलिए कॉल नही के कर सकी. और फिर हर रोज तो मैं ही आपको कॉल करती हूं.

सासु माँ- ह , मुझे तुम्हारी और विआन(पोता) की चिंता लगी रहती ह , पता नही वहाँ तुम दोनों कैसे रहते होंगे , विआन को किसी चीज की जरूरत तो नही होगी.

क्या ह न हमारे यहाँ जैसी वैसी वयवस्था वहाँ कहा यहा तो हम उसकी सारी जिद तुरंत पूरी करते थे. पता नही मेरे बच्चे को टाइम पर उसकी पसंद की icecream, chocolate मिलती भी होगी या नही या फिर मेरा बच्चा रोते रह जाता ह.

नीतू- अरे माँ जी आप तो ऐसे बोल रही जैसे वो अपने नाना, नानी के घर नही किसी गैर के यहाँ आया उसकी सारी जरुरत बोलने से पहले ही पूरी हो जाती ह.

सासु माँ- वो तो दिखता ह पिछली बार आयी थी तो तुम कितनी पतली हो गयी थी, पता नही वहाँ ठीक से खाती भी हो या नही हमारे यहा रहती हो तो कितनी चुस्त एंड दुरुस्त रहती ह हो. खेर इस बार पतली होक मत आना , जो भी खाना हो बाजार से मँगवा लेना पापा (नीतू के ससुर) ने पैसे तो तुम्हे जाने टाइम दिए ही थे.

नीतू- नीतू को अपनी सास माँ की बातों पे काफी गुस्सा आ रहा था पर वो उनके इस स्वाभाव से भली भांति परिचित थी, मन ही मन बोल रही थी हमेसा मेरे मैके वालो को अपने से नीचे समझने की तो उनकी आदत हो गयी और खुद कुछ कर दी या दे दी तो सिद्धे सिद्धे कह के घुमाके अपनी वाह वाई जरूर ले लेती ह. पर कुछ भी न बोली क्योंकि उसे पता था अगर वो कुछ कहेगी तो सासु माँ उसका गलत मतलब निकाल अपने पड़ोसी को और ससुर जी कहेगी की मैं तो उसे अपनी बेटी जैसे मानती हूं उसके लिए कितना कुछ करती हूं वगैरह वगैरह और खुद महान बन बन मुझे सर्मिन्दा कर देगी सभी के सामने. इसीलिए नीतू कुछ भी न कह के ठीक ह माँ जी मैं ध्यान रखूंगी अच्छा तो मैं फ़ोन रखती हूं आप अपना भी सेहत का ध्यान राखयेगा , विआन जग गया ह. प्रणाम

कुछ दिन बाद नीतू अपने ससुराल चले गई, वह हर रोज की तरह आ सुबह भी वो अपने काम मे लग गयी. सभी को सवेरे की चाय दे कर नास्ते की तैयारी की, फिर विआन कोहला , धुलाक़े तैयार किया. अब सास, ससुर का नाश्ता लगाई और माँ जी पापा जी नास्ता कर लीजये लग गया ह कह कर दुकान पे भेजवाने के लिए पति देव नास्ता पैक करने लगी .

उधर नीतू के सास , ससुर साथ बैठ कर नास्ता करने लगे तभी सासु माँ , सासुर जी के कानों में dhere dhere फूस फुसा रही थी , तभी नीतू और कुछ लिजयेगा पूछने जा रही थी तभी उसने सुना माँ जी हमेसा की तरह कह ससुर जी के कान भरते हुए कह रही थी – पता नही इसके मायके वाले कैसे रखते ह जब भी वहाँ से आती ह तो कितनी पतली हो जाती ह ,हमारे यहाँ जैसा आराम और वयवस्था जो नही मिलता होगा होगा.

नीतू- आज मानो जैसे नीतू के सब्र का बाण टूट गया और वह झल्ला उठी, ह माँ जी आप ठीक ही कहती ह आपके यहाँ में घर के सारे काम खत्म कर और आपकी सेवा करने के बाद खुद खाती हु या कोई काम करती हूं , सुबह सबसे पहले जाग और रात को सारे काम खत्म कर सबसे बाद में सोने जाती ह.

वही माँ के यहा देर से उठती हु , और पहले उनके हाथो का बना खाना खा कौन सा काम हुआ और कौन नही बिना किसी चिंता के जो मर्जी वो करती हूं, जहा मर्जी आजाद पंछी की तरह घूमती हु और रात को बिना चिंता के किसने खाया या नही सबसे पहले खा के सो जाती हु ए कोई tv programme देखे बैठ जाती ह.

इसी लिए लगता ह वहाँ पतली और आपके घर मे मोटी और दुरुस्त हो जाती ह.

प्रिये पाठक ये कहानी कल्पना मात्र ह. आप लोगों को अगर पसंद आये तो Indianwomania.com को like, share, comment and Subscribe करना न भूले.

लेखक – शालिनि सुमन

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